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सर्वोत्तम परिणाम, सिहन्ता की पहचान

हमारी कार्ययोजनाः-

  • प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा अलग-अलग
  • शून्य से शिखर तक
  • 300 घंटों की बेसिक की कक्षाएँ
  • 900 घंटों की नियमित कक्षाएँ
  • 70 घंटों की अंतःविषयक कक्षाएँ
  • प्रतिदिन उत्तर लेखन के तहत 600 प्रश्नों का अभ्यास
  • करेंट अफेयर्स की नियमित कक्षाएँ
  • मुद्दा मंथन

प्रारंभिक परीक्षा

पिछले वर्षाें की प्रारम्भिक परीक्षा का परिणाम यह बताता है कि कट-ऑफ अंक 50 प्रतिशत के आस-पास रह रहा है। इसके बावजूद हिन्दी माध्यम का परिणाम यदि पिछड़ रहा है तो निश्चय ही यह मंथन का मुद्दा है और इसका निदान निकालना होगा । यदि हम समस्या की जड़ को समझें तो इसके 4 कारण उल्लेखनीय हैं-

  1. करेंट अफेयर्स पर अत्यधिक समय लगाने के कारण पारंपरिक सामान्य अध्ययन की उपेक्षा।
  2. पढ़ाई की बजाए टेस्ट सीरीज पर ज्यादा फोकस
  3. पुस्तकों की पढ़ाई के बजाय नोट्स और गाइड की पढ़ाई पर ध्यान केंन्द्रित रखना।
  4. बगैर समझे रटते रहना।

आप इन बाजारू प्रवृत्तियों से बचते हुए ईमानदार बौद्धिक वृत्ति अपनाइए। अध्ययन का दायरा व्यापक बनाइए। करेंट जरूर पढ़िए, लेकिन उसका कन्वेंशनल लिंक भी जानिए। अलग-अलग दोनों में से कोई भी नहीं पास करा सकता। कम से कम तीन विषयों को इतना मजबूत कर लीजिए कि वह आधार भी बन जाए और कुछ अतिरिक्त अंक भी दिला दे। इसके लिए मुख्य परीक्षा और प्रारम्भिक परीक्षा दोनों ही दृष्टियों से उपयोगी विषयों का चयन ज्यादा उपयुक्त रहेगा।
आप पिछले 10 वर्षों के प्रश्न-पत्रों का विश्लेषण कर प्रश्नों के स्तर एवं उसकी दिशा-बोध का विकास करें। इसके साथ ही कम से कम 700 प्रश्न आप स्वयं बनाएँ। ये प्रश्न पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्रों और एनसीईआरटी की पुस्तकों के आधार पर बनाया जाना चाहिए। कम से कम 150 प्रश्न करेंट अफेयर्स पर आधारित होने चाहिए। इसके बाद आप जब भी पढ़ेंगे तो आपके दिमाग में यह बात उपजती रहेगी कि यहाँ से कैसा प्रश्न आ सकता है।

सिहन्ता आईएएस आपको प्रारम्भिक परीक्षा पास कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके तहत हम चार ठोस बिन्दुओं पर अपना ध्यान केन्द्रित रखते हैं:

  • बिल्कुल ही प्रासंगिक अध्ययन सामग्री।
  • करेंट की बहुआयामी तैयारी।
  • गहन एवं वैचारिक अध्ययन ताकि बेसिक तथ्यात्मक जानकारी ठीक हो जाए, विषय की समझ स्पष्ट हो जाए और सम्भावी प्रश्न पक्षों पर विशेष फोकस हो सके।
  • 16000 प्रश्नों के माध्यम से तैयारी ताकि अधिक से अधिक प्रश्नों के माध्यम से विभिन्न एवं सूक्ष्मतम आयामों का अध्ययन हो सके। टेस्ट केे क्विज का पक्ष आपको बेसिक तथ्यों के स्तर पर मजबूत बनाएगा। कई विशेष तरह के ट्रिक्स भी आप इसी रास्ते सीख जाएँगे और कई तरह की गलतियों से भी बच जाएँगे।

स्मरणीय है कि विषय की समझ और बेसिक तथ्य दोनों की अच्छी तैयारी हो जाए तो आप गलत विकल्पों की छँटनी के माध्यम से भी कई प्रश्न ठीक करने में सफल हो जाएँगे। यदि आपने इस रास्ते अपनी तैयारी की तो निगेटिव मार्किंग की समस्या भी आपके लिए एक सापेक्षिक लाभ की स्थिति बन जाएगी।

मुख्य परीक्षा

मुख्य परीक्षा के कुल 1000 अंकों में से हिन्दी माध्यम के अभ्यर्थियों को सामान्यतः 400 से ज्यादा अंक नहीं आ पा रहा है। इसके सापेक्ष यदि अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों के प्रदर्शन पर ध्यान दें तो उनके बीच से कई लोग 450-500 के बीच का अंक ले आते हैं। कुछ विद्यार्थी तो 500 से भी ज्यादा अंक ले आते हैं। हिन्दी और अंग्रेजी माध्यम के बीच का असली अंतर इसी विषय के 50 से 100 अंकों के अंतर से पैदा होता है। हिन्दी माध्यम के रिजल्ट की समस्या पर बात करने वाले या तो निराशा की बात करते हैं या समस्या का सामान्यीकरण करते हुए संघ लोक सेवा आयोग को दोष देते हैं, अथवा करेंट की प्रधानता पर ध्यान केन्द्रित कर देते हैं। वस्तुतः इसके तहत प्रश्नों की कुल चार श्रेणियाँ हैं।

1. सामान्य प्रश्न, जिनका उत्तर आधारभूत कन्वेंशनल पढ़ाई से निकल जाता है। हिन्दी वाले यहाँ अंग्रेजी वालों के बराबर हैं।

2. करेंट के मुद्दों को किसी कन्वेंशनल टाॅपिक से जोड़कर पूछा गया प्रश्न। यहाँ अंग्रेजी माध्यम वाले आगे निकल रहे हैं। इसका कारण सिर्फ करेंट में निहित नहीं है, बल्कि इसमें निहित है कि वे अपनी जानकारी को अपडेट तो करते ही हैं,उसे एपलाइड भी बनाते हैं और यह काम वे भारत और विश्व के बड़े विद्वानों के लेखों को पढ़कर करते हैं। इससे न सिर्फ उनकी जानकारी बढ़ती है, बल्कि उनकी तर्कशीलता और प्रस्तुति दोनों का विकास होता है। आप इस फ्रंट पर कुछ उपाय अपनाकर दोनों माध्यमों के अन्तर को यथासम्भव कम कर सकते हैं।

3. ऐसे प्रश्न जो विचारधारा पर आधारित होते हैं और एपलाइड होते हैं। यहाँ अंग्रेजी माध्यम वाले अपनी अच्छी विद्यालयी और विश्वविद्यालयी शिक्षा का लाभ उठाकर आगे निकल जाते हैं। इसके साथ ही, उनमें अच्छी पुस्तकें पढ़ने की आदत भी होती है जो उन्हें लाभ की स्थिति में ला देती है। इस अन्तर को आप तीन माध्यमों से पाट सकते हैं।

      A) अपना आधर मजबूत करें ताकि आप स्तरीय और एपलाइड पढ़ाई करने की स्थिति में आ जाएँ।

      B) कुछ स्तरीय पुस्तकें पढ़ें ताकि आपकी समझ का दायरा व्यापक हो, विचार में गहराई और तार्किकता आए और भाषा अच्छी हो जाए।

     C) शिक्षकों और मित्रों की चर्चा का लाभ उठाइए और अधिक से अधिक लिखने का प्रयास करें क्योंकि इसी रास्ते आप वैचारिक गहराई का विकास कर सकते हैं। ऐसे प्रश्नों का उत्तर लिखने के लिए विभिन्न विषयों पर अपनी राय बनाना आवश्यक होता है। यह कार्य सबसे कठिन और श्रमसाध्य होता है, लेकिन यह तर्कशीलता और जुझारूपन का प्रश्न है न कि भाषा का। अतः यहाँ आप अंग्रेजी माध्यम की बराबरी कर सकते हैं।

4. अंतःविषयक समझ पर आधारित प्रश्न। इनका सम्बन्ध किसी एक विषय मात्र से नहीं होता है, अतः शिक्षक इसकी उपेक्षा कर देते हैं। परिणाम यह होता है कि सबसे जटिल हिस्सा विद्यार्थी को स्वयं करना पड़ता है। यहाँ हिन्दी या अंग्रेजी का कोई मामला नहीं है। यह अच्छी या बुरी शिक्षा/कोचिंग का मामला ज्यादा है। इसकी रणनीति के विस्तृत पक्ष को जानने के लिए आप 12-02-2020 को सिहन्ता की रणनीति की नि:शुल्क परिचर्चा में शामिल हो सकते।हलॉंकि इसके लिए सीट का पंजीकरण पहले ही करा लेना सुविधाजनक रहेगा।

स्मरणीय है कि आयोग की परीक्षा के ज्यादातर प्रश्नों के पीछे कई तरह के निर्देशात्मक शब्द जुड़े रहते हैं और प्रश्नों के उत्तर की रूप-रेखा इसी के अनुरूप गढ़नी होती है। इसके लिए शब्दों की समझ और विषय की समझ के साथ व्यवसायिक तरीके से उत्तर-लेखन का अभ्यास आवश्यक है। इसमें हिन्दी और अंग्रेजी माध्यम का कोई भेद नहीं है। अतः आप इस मोर्चे पर भी बराबरी कर सकते हैं। इन समस्याओं के समाधान का एक इमानदार प्रयत्न कर आप भी 450-500 या उसके भी पार जा सकते है।मैं आपके इस महान प्रयाण का सारथी बनना चाहता हूँ । सिहन्ता वाले इतिहास (Optional)में शानदार अंक लाकर पिछले 15 वर्षों से लगभग प्राय:हर साल सर्वाधिक अंकधारी बनते रहे हैं।इस बार भी हमारे ६ विघार्थियों को 500 मे 300 या इससे ज्यादा अंक मिला है।इसके पीछे मेरे और मेरे विघार्थियों की साधना ही निर्णायक रही है और यही कामयाबी मुझे GS में भी 500/1000 की सम्भावना को लेकर आशावान बनाती है।

मैं जानता हूँ कि यह एक चुनौतीपूर्ण कार्य है लेकिन मैं यह भी जानता हूँ कि यदि हम (मैं और आप) अपनी हड्डियॉं गँलाएंगे तो यज्ञ ज़रूर पूरा होगा। मैं मानता हूँ कि पेड़ के सबसे उपर की टहनी पर जो सबसे मीठा फल है,उस पर आपका भी बराबर का हक़ है।आप चाँद तक भी जा सकते हैं सिर्फ छत तक नहीं।।

                                       

Sihanta IAS academy is one of the Best IAS Institute in Delhi (Best IAS Coaching in Delhi) for the preparation of Civil Services Examination. It has been a privilege to teach more than 40000 students since 2002. More than 1800 aspirants could meet their destiny by qualifying UPSC and PCS exams under the committed and qualified guidance of Sri Rajnish Raj and the team SIHANTA. Our excellence is evident in the results varying from top ranks to top Marks as well. Along with History optional we started GS under the banner of GS academy and ICS with extraordinary success. Later on we moved to launch General studies (GS Foundation Course) under the banner of SIHANTA only. The only mission I have in my sight is the 500+ Marks in GS mains and hundreds of results in PT. We have proved on prudence in our past on account of meticulous, study material, consistent focus on conceptual clarity, regular answer writing to develop the applicational aspect and crafty as well as relevant writing skill. Scholarliness has been the cardinal principle of our institute but at the same time we are always committed to the professional aspect of the preparation which needed even harder and smart work. This is the secret of becoming Sihanta IAS Academy the Top UPSC institute (UPSC Coaching) in Delhi.

I invite you all the talented and ambitious aspirants to join our mission with a simple and solemn promise that you work hard with us we will work even harder for you.


Course Curriculum

Section 1: Introduction

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