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दक्षिणी चीन सागर में चीन ……..

दक्षिणी चीन सागर में चीन के द्वारा एकाधिकार के नए प्रयास से वैश्विक तनाव की संभावना


कुछ दिन पूर्व ही चीन के तटरक्षक बल के एक पोत द्वारा दक्षिण चीन सागर के पार्सल द्वीप समूह (Paracel Islands) में वियतनाम की मछली पकड़ने वाली नौकाओं को डुबाने का प्रयास किया गया। निश्चित रूप से चीन की यह हरकत वियतनाम की संप्रभुता का उल्लंघन कर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाली है।इसी विवाद को लेकर अमेरिका के दो युद्ध पोत दक्षिणी चीन सागर में घुस गए हैं जिससे यह मुद्दा और पेचीदा बन गया है।

दक्षिण चीन सागर में स्थित विभिन्न देशों के बीच इस क्षेत्र में अपना दावा स्थापित करने को लेकर तनाव व्याप्त है, लेकिन मूल विवाद की जड़ है दक्षिण चीन सागर में स्थित स्पार्टली और पार्सल द्वीप। यह दोनों द्वीप कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस से परिपूर्ण हैं और वियतनाम का भाग है।

चीन दक्षिण-चीन सागर के 80% हिस्से को अपना मानता है। यह एक ऐसा समुद्री क्षेत्र जहाँ प्राकृतिक तेल और गैस प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।दक्षिण चीन सागर सबसे महत्त्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक है। यदि इस क्षेत्र में तनाव इसी प्रकार जारी रहा तो शिपिंग और आर्थिक गतिविधियाँ बाधित हो जाएंगी।

पूर्वी एशिया में अमेरिका की व्यापक सुरक्षा प्रतिबद्धताएँ हैं। अमेरिका ने इस क्षेत्र के कई देशों जैसे फिलीपींस, सिंगापुर और वियतनाम के साथ सुरक्षा गठबंधन भी कर रखा है। इसलिये इन देशों का चीन के साथ कोई भी विवाद अमेरिका को सीधे प्रभावित करेगा।

दक्षिण चीन सागर में 11 बिलियन बैरल प्राकृतिक तेल के भंडार हैं। 190 ट्रिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस के भंडार है , जिसके 280 ट्रिलियन क्यूबिक फीट होने की संभावना व्यक्त की गई है। यह क्षेत्र ऐसा हैं जहाँ से हर वर्ष 5 ट्रिलियन डॉलर मूल्य का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार होता है। यहाँ स्थित महत्त्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों के जरिये अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में सुगमता होती है।

– उपेन्द्र अनमोल

image source: jagranjosh

© Sihanta IAS
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